माता सती का आत्मदाह और वीरभद्र का तांडव: जब महादेव के तीसरे नेत्र से भस्म हुआ राजा दक्ष का अहंकार
जब प्रेम की मर्यादा पर अहंकार का वार होता है, तो सृष्टि का संतुलन डगमगा जाता है। भगवान शिव और माता सती की गाथा केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि स्वाभिमान, भक्ति, प्रेम और ब्रह्मांडीय न्याय का सबसे गहरा आख्यान है। कनखल की यज्ञशाला में जब राजा दक्ष के कटु वचनों से आहत होकर माता … Read more