घर बैठे पंचकर्म: आयुर्वेद के 5 आसान तरीके जो बदल देंगे आपकी सेहत

क्या आपको लगता है कि पंचकर्म कराने के लिए महंगे-महंगे आयुर्वेदिक सेंटर जाना पड़ेगा और मोटी रकम खर्च करनी पड़ेगी? अगर हां, तो यह सोच बदलने का वक्त आ गया है।

सच यह है कि सौ में से निन्यानबे लोग अपने शरीर को घर पर ही, बिना किसी भारी-भरकम पैकेज के, बेहतर बना सकते हैं। हां, कुछ गिने-चुने मामलों में, जहां तकलीफ ज्यादा गंभीर हो, वहां किसी वैद्य की मदद लेना ज़रूरी हो जाता है। लेकिन आम लोगों के लिए घर पर की जाने वाली ये पांच आदतें ही काफी हैं।

इन्हें आप “पंचक्रिया” कह सकते हैं। ये पंचकर्म जितना ही फायदा देती हैं, लेकिन जेब पर कोई बोझ नहीं डालतीं। आइए, एक-एक करके समझते हैं।


1. सुबह उठते ही करें तेल से कुल्ला (गंडूष क्रिया)

दिन की शुरुआत इस एक आदत से करें। सुबह उठते ही मुंह में थोड़ा-सा तेल लें, उसमें थोड़ा पानी मिलाएं और मुंह को अच्छी तरह फुलाकर भर लें। इसे गंडूष या कवल ग्रह कहा जाता है।

  • इसे करीब 5 से 10 मिनट तक मुंह में रखें, फिर बाहर थूक दें।
  • यह क्रिया दांत साफ करने और शौच जाने से पहले करें।
  • शरीर के कई विषैले तत्व (टॉक्सिन्स) इसी दौरान मुंह के जरिए बाहर खिंच आते हैं।

कौन-सा तेल इस्तेमाल करें?

  • अगर आपकी तासीर गर्म है, तो तिल का तेल या नारियल तेल लें।
  • अगर आपकी प्रकृति ठंडी और कफ वाली है, तो सरसों का तेल बेहतर रहेगा।
  • अगर आपको वायु यानी गैस की शिकायत रहती है, तो तिल का तेल ही चुनें।

रोज करना मुश्किल हो तो कोई बात नहीं, हफ्ते में पांच दिन भी कर लें तो फायदा जरूर मिलेगा। और हां, इससे दांतों की परत घिसने का कोई डर नहीं है, बस बताई गई मात्रा और समय का ही पालन करें।


2. नाभि और मल द्वार में तेल लगाना

इसे हल्के-फुल्के अंदाज़ में “गणेश क्रिया” भी कह सकते हैं। शौच जाने के बाद नाभि और मल द्वार पर तेल लगाना शरीर के लिए बहुत फायदेमंद माना गया है।

तेल का चुनाव आपकी तकलीफ के हिसाब से करें:

  • मल द्वार में खुजली या जलन महसूस हो तो सरसों का तेल लगाएं।
  • खून आने या पाइल्स जैसी दिक्कत में नारियल तेल राहत देता है।
  • गैस या वायु की समस्या में तिल का तेल फायदेमंद रहता है।

यही तेल नाभि पर भी लगा सकते हैं।


3. सिर और शरीर की मालिश

मालिश शरीर को अंदर से मजबूत बनाने का सबसे पुराना और असरदार तरीका है। पूरी मालिश रोज करना मुश्किल हो तो कम से कम हफ्ते में एक दिन सिर की और एक दिन शरीर की मालिश जरूर करें।

कुछ जरूरी बातें ध्यान रखें:

  • नहाने से पहले तेल से मालिश करें। नहाने के बाद अगर मालिश करनी हो, तो घी या मक्खन का इस्तेमाल करें।
  • घी को कई बार धोकर, ठंडे पानी से साफ करके शतधौत घृत भी बनाया जाता है, जिसे नहाने के बाद लगाया जा सकता है।
  • सिर पर हमेशा ठंडी तासीर का तेल लगाएं, गर्म तेल नहीं। चंदन बला लाक्ष तेल इसके लिए बेहतरीन माना गया है, यह गर्मी-सर्दी दोनों में काम आता है।
  • शरीर को गर्माहट देनी हो तो बला अश्वगंधादि तेल से मालिश करें।
  • मालिश के 20-30 मिनट बाद हल्के गुनगुने पानी से नहा लें।
  • रात में मालिश करनी हो तो खाना खाने के 2-3 घंटे बाद करें। गर्मियों में रात की मालिश से बचें, क्योंकि पसीना आने से बदबू हो सकती है। सर्दियों में रात की मालिश नींद अच्छी लाती है।
  • एक ही दिन सिर और शरीर, दोनों की मालिश न करें। दोनों अलग-अलग दिन करें, ताकि खून का बहाव सही दिशा में बना रहे।
  • जिन्हें हाई बीपी या दिल की तकलीफ है, वे मालिश हमेशा हृदय की दिशा में करें, उल्टी दिशा में नहीं। पैरों को नीचे की ओर मालिश करना गलत तरीका है, इसे सिर्फ हाई बीपी में फर्स्ट एड की तरह ही अपनाएं। रोज इस तरह उल्टी मालिश करने से दिल और नसों के वाल्व कमजोर पड़ सकते हैं।
  • मालिश हमेशा शांत और सुगंधित माहौल में करें, हल्की ठंडी हवा हो, कमरे में खुशबू फैली हो। भरपेट खाना खाकर मालिश कभी न करें।

4. सप्ताह में एक बार पेट की सफाई (विरेचन)

हफ्ते में एक दिन पेट को अच्छी तरह साफ करना शरीर के लिए वरदान जैसा है। इसके लिए यह तरीका अपनाएं:

  1. सूखी हरड़ लें और उसे एरंड तेल (कैस्टर ऑयल) में उसी तरह भूनें, जैसे प्याज-टमाटर का तड़का लगाते हैं। जब तेल पूरी तरह सोख ले, तो इसे पीसकर रख लें।
  2. उस रात हल्का भोजन करें, या हो सके तो खिचड़ी खाकर सोएं।
  3. भोजन के करीब एक घंटे बाद, गुनगुने पानी के साथ हरड़ का चूर्ण ले लें।
  4. जिन्हें हरड़ सूट नहीं करती, वे मुलेठी का इस्तेमाल कर सकते हैं। या फिर दूध में एरंड तेल की दो-तीन चम्मच मिलाकर पी सकते हैं।

अगले दिन पेट अच्छी तरह साफ हो जाएगा। अगर दस्त ज्यादा लगें, तो थोड़ा गुनगुना पानी पी लें, आराम मिल जाएगा। साथ ही हल्का भोजन जैसे फल, सूप या घी वाली खिचड़ी लें।

यह प्रक्रिया हफ्ते में एक बार करना काफी है। खासकर जब गैस या अपच ज्यादा महसूस हो, तब दवाइयों की जगह यह तरीका आजमाएं। खाने के बाद छाछ पीने की आदत भी शरीर को अंदर से चिकनाई और राहत देती है, जब गैस की तकलीफ ज्यादा हो तो इसे बढ़ा दें।


5. नस्य: नाक के जरिए घी-तेल का इस्तेमाल

नस्य का मतलब है नाक में तेल या घी की बूंदें डालना। तेल का चुनाव फिर वही तीन तासीरों के हिसाब से करें:

  • कफ की तकलीफ में तीखे और तीक्ष्ण तेल जैसे अणु तेल का इस्तेमाल करें।
  • गर्मी की शिकायत हो, नाक से गर्म पानी बहता हो, आंखों में जलन हो, तो नारियल तेल या घी बेहतर रहेगा। घी की तासीर ठंडी होती है और यह शांति देता है।

कैसे करें: रुई या ड्रॉपर की मदद से हर नथुने में 2 से 4 बूंद डालें। बच्चों के लिए सिर्फ 2 बूंद ही काफी हैं। यह सुबह के समय, शौच और नाक साफ करने के बाद करना सबसे अच्छा रहता है। चाहें तो दिन में भी कर सकते हैं, बस सोए हुए व्यक्ति को नस्य कभी न दें।


आखिरी कदम: स्वेदन यानी पसीना निकालना

पंचक्रिया की आखिरी कड़ी है स्वेदन, यानी पसीना निकालना। यह मालिश, व्यायाम या धूप में बैठने से अपने आप हो जाता है।

अगर आपको सर्दी-जुकाम या कफ की शिकायत रहती है, तो अजवाइन डालकर गर्म पानी की भाप लें। इससे नाक से कफ निकलने में आसानी होती है। महिलाएं चेहरे और बालों पर भी भाप ले सकती हैं, इससे त्वचा और बाल मुलायम बनते हैं। भाप लेने के बाद चेहरे पर एलोवेरा या कोई फेस पैक लगाया जाए, तो उसका असर और बेहतर होता है, क्योंकि रोमछिद्र खुल चुके होते हैं।


एक जरूरी सुझाव

धूपबत्ती की जगह पर घर में गोबर से बनी औषधीय धूप का इस्तेमाल करें, जिसमें गाय का घी और गुग्गल मिला हो। बाजार की अगरबत्तियों में बांस की तीली होती है, जो सांस से जुड़ी दिक्कतें दे सकती है। दिन में दो-चार मिनट इस तरह का धूम्रपान लेना नुकसानदायक नहीं, बल्कि फायदेमंद है।


नतीजा क्या निकलता है?

ये पांचों तरीके जब आप अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं, तो शरीर ही नहीं, मन भी शांत होने लगता है। आयुर्वेद के अनुसार जब वायु संतुलित होती है, तो बेचैन विचार खुद-ब-खुद थमने लगते हैं, ध्यान और भजन में मन लगने लगता है।

व्यस्त जीवनशैली में हर दिन ये सारी क्रियाएं करना मुमकिन न हो, तो कोई बात नहीं। जिस दिन जो हो सके, वह कर लें। जिस अंग में वायु या तकलीफ ज्यादा महसूस हो, वहां ध्यान देकर तेल-मालिश कर लें। धीरे-धीरे यह आपकी आदत बन जाएगी और आप खुद फर्क महसूस करेंगे।

नोट: ऊपर बताए गए सभी उपाय सामान्य जानकारी और पारंपरिक आयुर्वेदिक सलाह पर आधारित हैं। किसी गंभीर बीमारी या लगातार तकलीफ की स्थिति में किसी योग्य वैद्य से सलाह जरूर लें।

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