आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब खान-पान और स्क्रीन (मोबाइल-टीवी) के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर किसी की आँखों पर चश्मा चढ़ता जा रहा है। बहुत से लोगों का मानना है कि एक बार चश्मा लग जाए, तो वह कभी उतर नहीं सकता। लेकिन आयुर्वेद में सही नियमों, परहेज और औषधियों की मदद से आँखों की रोशनी को दोबारा बेहतर बनाना और चश्मा हटाना पूरी तरह संभव है।
चाहे आपका नंबर प्लस (+) हो या माइनस (-), सिलिंड्रिकल हो या स्फेरिकल, अगर आप सही अनुशासन और मेहनत के साथ आयुर्वेद के रास्ते पर चलते हैं, तो कुछ ही महीनों में आपको चमत्कारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
आँखों की रोशनी कम होने की मुख्य वजहें
पुरानी पीढ़ियों के मुकाबले आजकल बच्चों में बहुत कम उम्र में चश्मा लगने के कई प्रमुख कारण हैं:
- खराब खान-पान: आजकल के बच्चे और युवा घर का शुद्ध खाना, घी और छाछ छोड़कर फास्ट फूड, नूडल्स और डिब्बाबंद चीजें खाना पसंद करते हैं। बाहर मिलने वाली ग्रेवी और सब्जियां अक्सर बासी होती हैं, जिससे उनकी पौष्टिक क्षमता (Nutritional Value) खत्म हो जाती है।
- अत्यधिक स्क्रीन टाइम: घंटों मोबाइल देखना, तेज रोशनी वाली लाइट्स में रहना और लगातार टीवी के सामने बैठे रहने से आँखों की नसें कमजोर हो जाती हैं।
- ठंडी और खट्टी चीजों का सेवन: ज्यादा ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स, इमली और बहुत ज्यादा खट्टी-तीखी चीजें भी नजर को कमजोर करती हैं।
चश्मा हटाने के लिए आयुर्वेदिक औषधियां
यदि आपकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है, तो आयुर्वेद के अनुसार निम्नलिखित औषधियों का मिश्रण आँखों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। (नोट: बच्चों के लिए इसकी खुराक आधी की जा सकती है, यह ज़रूर ध्यान रखें कि हर व्यक्ति का शरीर और प्रकृति अलग होती है, इसलिए नतीजे भी अलग-अलग हो सकते हैं। कोई भी उपाय शुरू करने से पहले आंखों की जांच और किसी योग्य वैद्य या डॉक्टर की सलाह जरूर लें।)
जरूरी सामग्रियां:
- सप्तामृत लौह – 1 गोली
- सारिवादि वटी – 1 गोली
- शुक्रमातृका वटी – 1 गोली
- महात्रिफला घृत – पौना से एक चम्मच (साधारण त्रिफला नहीं, बल्कि महात्रिफला घृत का ही प्रयोग करें)
- शुद्ध शहद
दवा लेने का सही तरीका:
- सबसे पहले तीनों गोलियों (सप्तामृत लौह, सारिवादि वटी, शुक्रमातृका वटी) को पीसकर पाउडर बना लें।
- अब इसमें अपनी शारीरिक प्रकृति के अनुसार महात्रिफला घृत और शहद मिलाएं।
- शहद और घी की मात्रा का विशेष नियम: आयुर्वेद में घी और शहद को कभी भी बराबर मात्रा में नहीं मिलाया जाता, क्योंकि यह शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
- यदि आपका शरीर ठंडा रहता है (कफ प्रकृति), तो घी से दुगुना शहद मिलाएं (जैसे 1 चम्मच घी तो 2 चम्मच शहद)।
- यदि आपके शरीर में गर्मी ज्यादा रहती है (पित्त प्रकृति), तो घी की मात्रा से आधा शहद मिलाएं।
- इस तैयार मिश्रण को सुबह नाश्ते के करीब डेढ़ घंटे बाद और रात को भोजन के डेढ़ घंटे बाद चाटें।
- मिश्रण को चाटने के 10 मिनट बाद एक गिलास गुनगुना गाय का दूध पी लें। आप चाहें तो इस दूध में एक चम्मच बीजू चूरी भी मिलाकर ले सकते हैं।
दवा के साथ-साथ इन नियमों का पालन है जरूरी
आयुर्वेद केवल दवाओं से काम नहीं करता, इसके साथ जीवनशैली में बदलाव करना भी अनिवार्य है:
- गाय के घी का प्रयोग: आँखों की नसों को पोषण देने के लिए आँखों में नियमित रूप से एक-एक बूंद शुद्ध गाय का घी डालें। इसके अलावा कानों के पीछे, पैरों के तलवों में और नाभि (Navel) पर भी गाय का घी लगाएं।
- कर्ण पूरण और नस्य: नसों में स्निग्धता (नमी) बनाए रखने के लिए नाक में गाय का घी डालें (नस्य) और हफ्ते में एक बार कानों में हल्का गुनगुना सरसों का तेल डालें।
- चश्मे का कम इस्तेमाल: जब आप दवाइयां शुरू करें, तो हर समय चश्मा लगाकर न रखें। जब बहुत ज्यादा जरूरी हो (जैसे पढ़ते या काम करते समय), तभी इसका उपयोग करें। जब आप चश्मा हटाते हैं, तो आँखों की अपनी ऊर्जा और फोकस काम करना शुरू करता है, जिससे रोशनी बढ़ती है।
- स्क्रीन से दूरी: मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम करें। टीवी देखना हो तो सुरक्षित दूरी से देखें या सीधे स्क्रीन की तरफ देखने के बजाय परावर्तन (Reflection) के नियमों का पालन करें।
- सात्विक आहार: अपने भोजन में गाजर, आंवला, सौंफ, मूंग की दाल, मिश्री, ताजा माखन और छाछ जैसी चीजों को शामिल करें। बासी भोजन, सॉफ्ट ड्रिंक्स और ज्यादा नमक खाने से बचें।
- चंद्र दर्शन: पूर्णिमा के आसपास रात के समय कुछ देर चंद्रमा को निहारें। चांद की रोशनी में रखी हुई खीर का सेवन करना भी आँखों के लिए बहुत उत्तम माना जाता है।
विशेष व्यायाम: हाथों और भुजाओं की एक्सरसाइज
आँखों के उपचार के साथ शरीर में रक्त संचार (Blood Flow) बढ़ाने के लिए एक सरल व्यायाम करें:
- अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर छाती के सामने रखें।
- अब सांस भरते हुए दोनों हाथों को सामने की तरफ पूरी ताकत से धक्का दें।
- ध्यान रहे कि एक हाथ से दूसरे हाथ को विपरीत दिशा में दबाना है।
- इस स्थिति में 10 से 15 सेकंड तक रुकें। इससे भुजाओं की मांसपेशियां खींचेंगी और शरीर में गर्माहट आएगी।
- थक जाने पर धीरे-धीरे हाथ नीचे ले आएं। यह क्रिया कंधों के स्तर (Level) पर ही करें।
आयुर्वेद का तरीका धीमा लेकिन टिकाऊ क्यों माना जाता है
एलोपैथी की दवा तुरंत असर दिखाती है, क्योंकि वो सीधा शरीर पर काम करती है। लेकिन उसका असर अक्सर कुछ समय के लिए ही रहता है। वहीं आयुर्वेद में औषधि पहले भोजन की तरह पचती है, फिर रस और रक्त बनकर धीरे-धीरे शरीर को पोषण देती है।
इसीलिए आयुर्वेदिक तरीके तभी अच्छे नतीजे देते हैं जब व्यक्ति धैर्य के साथ, लगातार 3 से 6 महीने तक परहेज और नियम अपनाए। जो लोग बीच में ही उम्मीद छोड़ देते हैं या परहेज नहीं कर पाते, उन्हें पूरा फायदा नहीं मिल पाता।
महत्वपूर्ण सलाह: आयुर्वेद में हर व्यक्ति के शरीर की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) अलग होती है। इसलिए इन नुस्खों को अपनाने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक (वैद्य) से अपनी जांच जरूर करवाएं, ताकि वे आपके शरीर के हिसाब से सही खुराक तय कर सकें। सकारात्मक सोच और सही परहेज के साथ 3 से 6 महीने तक इन नियमों का पालन करने से आँखों की रोशनी में निश्चित सुधार आता है।