पारिजात, जिसे हारसिंगार या नाइट जैस्मीन (Night Jasmine) भी कहा जाता है, आयुर्वेद में जोड़ों के दर्द और अर्थराइटिस (गठिया) के लिए सबसे अचूक औषधि माना गया है। इसके पत्तों में पाए जाने वाले विशेष तत्व एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन रोधी) और एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) गुणों से भरपूर होते हैं, जो घुटनों के पुराने से पुराने दर्द और यूरिक एसिड को कम करने में मदद करते हैं।
जोड़ों के दर्द में इसका सही लाभ उठाने के लिए इसके काढ़े को बनाने और पीने का एक विशेष नियम है:
1. पारिजात का काढ़ा बनाने की विधि
अगर आपको साइटिका, घुटनों का दर्द, या पुराना गठिया है, तो इस तरीके से काढ़ा तैयार करें:
- सामग्री: पारिजात के 4 से 5 ताजे पत्ते और 1 गिलास साफ पानी।
- पहला कदम: पत्तों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इन्हें ओखली में कूटकर या सिलबट्टे पर पीसकर एक गाढ़ा पेस्ट (चटनी जैसा) बना लें।
- दूसरा कदम: एक बर्तन में एक गिलास पानी डालें और उसमें इस पेस्ट को मिला दें।
- तीसरा कदम: पानी को धीमी आंच पर तब तक उबालें जब तक कि वह उबलकर आधा (आधा गिलास) न रह जाए।
- चौथा कदम: गैस बंद कर दें और काढ़े को छान लें। इसे गुनगुना या पूरी तरह ठंडा होने के लिए रख दें।
2. सेवन करने का सही नियम और समय
- समय: इस काढ़े को रोज सुबह खाली पेट चाय की तरह धीरे-धीरे चुस्कियां लेकर पीना चाहिए।
- परहेज: काढ़ा पीने के बाद कम से कम 30 से 45 मिनट तक कुछ भी न खाएं और न ही चाय-कॉफी पीएं।
- कितने दिन लें: गंभीर जोड़ों के दर्द में इसे लगातार 2 से 3 सप्ताह (15-20 दिन) तक लें। आपको हफ्तेभर में ही दर्द और सूजन में भारी कमी महसूस होने लगेगी।
ऋषि वाग्भट और राजीव दीक्षित जी का विशेष नियम:
आयुर्वेद के नियम के अनुसार, पारिजात का काढ़ा बेहद शक्तिशाली और क्षारीय (Alkaline) होता है। इसलिए इसे लगातार 3 महीने से ज्यादा कभी न पीएं। यदि दर्द बहुत पुराना है और आगे भी लेने की जरूरत है, तो 3 महीने पूरे होने पर 15-20 दिनों का ब्रेक दें, और फिर दोबारा शुरू करें।
3. इस्तेमाल के दौरान जरूरी सावधानियां
- ताजी पत्तियां ही चुनें: काढ़े के लिए हमेशा पारिजात की स्वस्थ और ताजी पत्तियों का ही इस्तेमाल करें। सूखी या पीली पड़ चुकी पत्तियों का असर कम हो जाता है।
- गर्मियों में सावधानी: पारिजात की तासीर गर्म होती है। इसलिए बहुत तेज गर्मी के मौसम में (जैसे मई-जून) अगर आप इसका सेवन कर रहे हैं, तो पत्तों की संख्या घटाकर 2 या 3 कर दें।
- गर्भवती महिलाएं बचें: गर्भावस्था के दौरान पारिजात के काढ़े का सेवन करने से बचना चाहिए।
यदि आपके घर के आसपास यह पेड़ नहीं है, तो आप इसे गमले में भी आसानी से लगा सकते हैं। जोड़ों के दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए यह पेड़ घर में होना किसी वरदान से कम नहीं है।