नकलची पड़ोसी और समझदार हरि: जैसे को तैसा

हरि बहुत ही मेहनती इंसान था। वह रोज़ी-रोटी कमाने के लिए कई तरह के व्यापार करता, लेकिन कभी मुनाफा नहीं कमा पाता था। इसकी सबसे बड़ी वजह उसका पड़ोसी दुकानदार था। हरि जब भी कोई नया काम शुरू करता, उसका पड़ोसी तुरंत वही चीज़ बेचकर उसका धंधा चौपट कर देता था।

बाज़ार की होड़ और नुकसान

एक दिन हरि बाज़ार में कद्दू बेचने गया। उसने ताज़ा कद्दू की आवाज़ लगाकर ग्राहकों को बुलाना शुरू किया। तभी उसका पड़ोसी भी कद्दू की टोकरी लेकर ठीक उसके सामने बैठ गया। पड़ोसी चिल्लाने लगा, “इधर आइए! ताज़ा और मीठा कद्दू खाइए। सामने वाले के पास तो सड़े हुए कद्दू हैं!” हरि के सारे ग्राहक पड़ोसी के पास चले गए और हरि को खाली हाथ लौटना पड़ा।

घर आकर हरि ने अपनी पत्नी से दुखड़ा रोया। पत्नी ने सलाह दी, “आप कल बाज़ार में मछली बेचने जाइए। शायद काम बन जाए।”

अगले दिन हरि रोहू मछली लेकर बैठा और 200 रुपये किलो की आवाज़ लगाने लगा। पड़ोसी तुरंत 500 रुपये किलो वाली हिलसा मछली ले आया और सस्ते में 450 रुपये किलो बेचने लगा। ग्राहक फिर से पड़ोसी की तरफ मुड़ गए। जब हरि ने विरोध किया, तो पड़ोसी ने उसे पागल कहकर उसका मज़ाक उड़ाया।

पत्नी की होशियार योजना

परेशान होकर हरि ने अपनी पत्नी से कहा कि वह बाज़ार में व्यापार करना छोड़ देगा। तब उसकी पत्नी ने मुस्कुराते हुए कहा, “चिंता मत करो, मेरे दिमाग में एक ज़बरदस्त तरकीब है। इस बार वह अपनी ही चाल में फँसेगा।”

हरि ने अपने घर की छत पर बिना खिड़की वाला एक बड़ा और सुरक्षित बाड़ा बनवाया। रात के अंधेरे में वह चुपचाप बहुत सारी बकरियाँ ले आया और छत पर बकरी पालन शुरू कर दिया।

पड़ोसी का जाल में फँसना

जब कई दिनों तक हरि बाज़ार नहीं आया, तो पड़ोसी और उसकी पत्नी बेचैन हो गए। पड़ोसी ने अपनी पत्नी से कहा, “जाओ, जाकर पता लगाओ कि हरि आजकल घर पर क्या कर रहा है।”

पड़ोसी की पत्नी हरि के घर पहुँची और बातों-बातों में पूछा, “भाभी, छत पर यह नया कमरा कैसा बनवाया है?”

हरि की पत्नी ने मुस्कुराते हुए झूठ बोला, “अरे, मेरे पति ने छत पर बड़ा सा पानी का हौज़ बनाया है और हम वहाँ मछली पालन कर रहे हैं। जब ये मछलियाँ बड़ी होंगी, तो बाज़ार में बेचकर बहुत सारा मुनाफ़ा कमाएंगे।”

पड़ोसी की पत्नी को दूर से बकरियों की आवाज़ सुनाई दी, तो हरि की पत्नी ने बात संभालते हुए कहा कि वह तो गली की बकरियों की आवाज़ है।

नकल का भयानक नतीजा

घर लौटकर पड़ोसी की पत्नी ने सारी बात अपने पति को बताई। पड़ोसी ने तुरंत अपने घर की पक्की छत पर चारों तरफ ईंटों की ऊँची दीवारें बनवा दीं और उसमें मोटर चलाकर पानी भर दिया। फिर उसने उसमें ढेरों मछलियाँ छोड़ दीं और लखपति बनने के सपने देखने लगा।

कुछ ही दिनों में पानी के भारी वज़न और सीलन से उसके घर की दीवारें भीगने लगीं और छत से पानी टपकने लगा। पत्नी के टोकने पर भी उसने घमंड में कहा, “थोड़े दिन रुक जाओ, मछलियाँ बेचकर जो पैसा आएगा, उससे पूरे घर में टाइल्स लगवा देंगे।”

सच्चाई की जीत

इधर हरि की बकरियाँ बड़ी हो गईं। उसने बाज़ार में सारी बकरियाँ बेच दीं और उसे पूरे 90 हज़ार रुपये की अच्छी कमाई हुई। हरि खुशी-खुशी घर लौट रहा था कि तभी उसने देखा कि उसके पड़ोसी का पूरा घर भरभराकर गिर गया और छत का सारा पानी नीचे बह गया।

पड़ोसी रोता हुआ अपने टूटे घर को देख रहा था। हरि ने उसके पास जाकर कहा, “जब इंसान दूसरों का बुरा सोचता है, तो भगवान उसका न्याय खुद करता है। तुम हमेशा मेरी नकल करके मेरा नुकसान करते थे। मैंने छत पर बकरियाँ पाली थीं और आज 90 हज़ार रुपये कमाए हैं। तुमने बिना सोचे-समझे नकल की और अपना ही घर डुबो दिया।”

पड़ोसी को अपनी जलन और नकल करने की आदत पर बहुत पछतावा हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

इस कहानी से मिलने वाली बड़ी सीख

  • नकल के लिए भी अक्ल चाहिए: किसी की सफलता देखकर बिना सोचे-समझे उसकी नकल करना हमेशा भारी पड़ता है।
  • जलन और लालच का फल बुरा: जो इंसान दूसरों का काम बिगाड़ने के लिए गड्ढा खोदता है, वह एक दिन खुद उसी में गिरता है।
  • धैर्य और समझदारी: मुश्किल वक्त में गुस्से के बजाय शांत दिमाग और सूझबूझ से काम लेना ही सबसे बड़ी ताकत है।

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